“जीवन एक सुरंग की तरह है, आप मेहनत के साथ आगे बढते चलिए, एक दिन दूसरे छोर से आने वाली रोशनी आपके पूरे जीवन को रोशन कर देगी |” – रितु मेडतवाल’

“जीवन एक सुरंग की तरह है, आप मेहनत के साथ आगे बढते चलिए, एक दिन दूसरे छोर से आने वाली रोशनी आपके पूरे जीवन को रोशन कर देगी |” – रितु मेडतवाल’

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हम एक बार फिर लौट आए है, एक ऐसी अकल्पनीय कहानी के साथ जो भरी है साहस और अविश्वसनीय मेहनत की गाथा से । इनका साहस और मेहनत के लिए ज़रूरी ज़िद और जुनून  ही इस कहानी का अवियोज्य अंग है।हम बात कर रहे है, भारतीय फिटनेस इंडस्ट्री के जानेमाने चेहरों में से एक रितु मेडतवाल की । ये नेशनल लेवल पावर लिफ्टिंग चैंपियन होने के साथ ही बोकवा मास्टर ट्रेनर भी है ।इनकी कहानी हमें ये सिखाती  है की  किसी भी सफलता की  कहानी  के पीछे की दास्तान उतनी ही मुश्किल होती है जितने बड़े उनके मुकाम होते  है ।

 इनके जीवन की शुरुआत   दो चोटी” बांध कर रहने वाली एक ‘छुईमुई ’ लड़की के तौर पर हुई लेकिन इनकी मेहनत इन्हें आज इन्हें कामयाबी के  शिखर  तक पहूँचा ही दिया । इन्होंने अपने जीवन मे जिस भी काम को  करने का  ठान लिया उसे पूरा  करने में अपनी जान लगा दी । ज़िंदगी के  खेल में  कई बार  गिर जाते है  पर उठ कर फिर  दुगुने उत्साह से चल देना की  एक  योद्धा का परिचय है।  इनकी दास्तान इसी का एक सटीक उदाहरण है । 

तो आइये हमारे साथ, एक छोटे शहर भीलवाड़ा  की एक शर्मीली लड़की के जीवन सफ़र पर , हर वो दर्द महसूस करने जिससे निकल कर उसने इतिहास रचा, आज हम पार करेंगे उन  उतार चढ़ावों से जिन्होंने बनाया जिद्धी और जिसे आज दुनिया सलाम करती है|

घर की चार दिवारी से शुरू हुआ एक बचपन

मेरा जन्म राजस्थान के एक  छोटे से ज़िले भीलवाड़ा मे हुआ । भीलवाड़ा इतना विकसित शहर नहीं था  यहाँ  को कामकाजी  महिलाओ  को  देखना  बड़ा ही  दुर्लभ  हुआ करता था ।  मेरे बचपन के समय में तो  पाश्चात्य संस्कृति यहाँ से कोषों दूर थी ।

मेरा बचपन ख़ुशियों से भरपूर था । एक जॉइंट फैमिली से होने के कारण  मुझे  संस्कारो का पाठ   बहूत  छोटी उम्र मे ही पढ़ा दिया गया था  ।   मेरे  माता पिता का  हमेशा से बहूत सहयोग रहा है ।मेरे  4 भाई बहनों के साथ खेलते खेलते कब मे बड़ी हो गयी  पता  ही नहीं चला ।

हमारा परिवार आर्थिक रूप से ज़्यादा  समृद्ध नही था । हमारे घर की पूरी आर्थिक ज़िम्मेदारी मेरे पिता के कन्धों पर थी ।उनके अलावा हम 9 लोग उन पर ही आश्रित थे । परिवार के बीच स्नेह की  पतवार से ही   हमारे जीवन की नौका संभली हुयी थी ।

मेरी विद्यालय की पढ़ाई  का समय  किसी एडवेंचर से कम नही था । जब मे आठवीं कक्षा  मे थी तो मेरी कद काठी ग्याह्र्वी की लड़कियों जैसी हो गयी थी। तो मेरे किसी दोस्त के सुझाव पर, मैंने स्कूल छोड़ कर ओपन बोर्ड से दसवीं  की  परीक्षा   देने का फैसला किया जिससे मेरी  नवी और दसवीं  कक्षा  एक साथ पास हो जाते । जैसे ही मैंने स्कूल छोड़ा  उसी साल नियमों मे कुछ फेर बदल हुआ, और घोषणा हुई की ओपन बोर्ड की परीक्षा पास करने के लिए भी अब छात्रों को दो साल लगेंगे । ये सर मुंडवाते  ही ओले पड़ने जैसा था । मैंने जैसे तैसे दो साल मे दसवीं तक की पढाई पूरी की ।

मैंने आगे होम साइंस विषय चुनने  का फैसला किया और  भीलवाड़ा के महिला आश्रम से बारहवीं  तक की शिक्षा पूरी की | मेरे स्कूल से पास होने वाली छात्राएं ज्यादातर  College of Homescience, Udaipur  मे दाख़िला लिया करती थी । उन्हीं से मुझे पता चला की JET(Joint Entrance Test ) नामक  एक परीक्षा है , जिससे पास करने के उपरांत  छात्रों को राजस्थान के बड़े कृषि  विश्वविद्यालयों में  दाख़िला मिलता है । मैंने किसी तरह इस एग्जाम को पास किया ।

मुझे  College of Homescience, Udaipur मै  एडमिशन मिला ।  ये मेरे और मेरे परिवार के लिए एक बहूत  बड़ा मौका था क्योंकि मेरे दूर के रिश्तेदारों मे भी कोई पढाई के लिए बाहर नही गया था । मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति  को देखते हुए, मेरे  कॉलेज की फ़ीस भरना एक मुश्किल कार्य था पर उन्होंने जैसे तैसे फ़ीस भर दी ताकि मेरे सपनो की उड़ान कहीं थम न जाये ।

घर से निकलते वक़्त मेरी और मेरे माता – पिता  की आँखे  नाम थी  क्योंकि  आज तक मै मेरे घर की गली से बाहर   भी अकेले नहीं गयी थी और अब मेरा रुख एक अनजान  शहर की और मूड चला था | मेरे मन मे डर भी था और ख़ुशी भी | डर था की मे अपना घर छोड़कर एक अनजान शहर जा रही थी और ख़ुशी थी की मेरे जीवन का एक नया अध्याय शुरू होने वाला था |

कॉलेज - क़ाबिलियत से साक्षात्कार  

आखिरकार वो दिन आया जब मैंने पहली बार कॉलेज प्रांगण  मे कदम रखा ।एक सुन्दर सा कैंपस था वहां, डिपार्टमेंट  और  उनके आस पास सजे हरे भरे गार्डन और प्लेग्राउंड ।ये एक अनजानी सी जगह थी, जैसे मेरी कोशिश जैसे   ख़्वाब से सीधा धरती पर उतर आई हो ।

पर इससे भी अनजानी एक और जगह थी … हॉस्टल  

मेरे हॉस्टल की पहली रात में कभी नही भूल सकती ।सलवार सूट पहने ,दो चोटी बांधे  कुछ तीस लड़कियों के बीच में मैं खड़ी थी  और हमारी सामने खड़े थे हमारे फाइनल इयर  के  सूपर सीनियर्स ।

यह हमारी पहली कॉल थी . जैसा की तब रैगिंग को कहा जाता था । मेरे दिल मे बस एक ही  बात थी  की मैं बस किसी  न किसी तरह इतने लोगों  के सामने बोलने से बच जाऊँ   |  

एक दम से मुझे एक सीनियर की आवाज़ आई  “What is your hobby? ”, मैंने  लड़खड़ाती सी आवाज़ में  कहा “Dance ” । सीनियर्स के लिए तो ये मनोरंजन का मौका बन गया और वो इसे कैसे हाथ से जाने देते , तो उन्होंने मुझे डांस करने को कहा ।मुझे आज भी याद है की उन्होंने फिल्म  ‘Love Aaj Kal ’ से  “Twist” गाना बजाया  । मैंने जाने कैसे वहां इतने लोगों के सामने  डान्स  कर दिया, और ऐसे ही मेरा डान्स में पदार्पण   हुआ ।

सीनियर्स को मेरा डांस बहूत पसंद आया और अब पुरे हॉस्टल मे मुझे सब मेरे डांस की वजह से पहचानने लगे । मेरे कॉलेज मे कॉम्पिटिशन हुए तो मेरे डांस को एक स्टेज भी मिला । मैंने कॉलेज लेवल के  कॉम्पिटिशन में कई ख़िताब जीते । एक डांसर से मेरा एक नया  सफ़र शुरू हो चूका था पर मुझे कभी लगा नहीं था की मैं इसे ही अपने करियर के रूप मे चुनूँगी ।

तभी मुझे मिली   सुश्री  नीतू चौपड़ा    (Free Flying Eagle as known on social media). वो अपने बैच की  ‘मिस फ्रेशेर ’ थी  और कॉलेज मे भी सभी एक्टिविटीज मे बहूत  एक्टिव थी । मिस फ्रेशेर्स कॉम्पिटिशन की तैयारी के दौरान  उन्होंने मुझे गाइड किया और मेरा मनोबल बढ़ाया । हालांकि में  वो कम्पटीशन जीत तो नही पाई पर उस कॉम्पिटिशन ने नीतू और मेरे बीच एक अच्छी बॉंडिंग  बन गयी थी  । मुलाक़ातें इतफ़ाक नहीं हुआ करती किसी  से  टकराने में कोई ना  कोई  मक़सद ज़रूर छिपा होता है और मेरे साथ भी  यही हुआ उसने मुझे ना केवल कामयाबी की सीढ़ी पर चढ़ने की तरकीबे सिखायी बल्कि हर मुश्किल घड़ी में साथ खड़े होकर मेरा मनोबल भी  बढ़ाया ।

मैं किसी से भी बात करने मे बहूत घबराया करती थी  , तो नीतू ने मेरे इस डर तो खत्म  करने के लिए मुझे इंटर कॉलेज   वाद-दिवाद प्रतियोगिता  की तैयारी करवाई । जहां मैं लड़कियों से बात करने मे झिझकती थी वहीँ अब मुझे स्टेज पर जाकर सैंकड़ो लोगों के सामने भाषण देना था ।

इस कम्पटीशन के लिए हमने बहूत मेहनत की । एक एक पैराग्राफ मुझे घंटो मे समझ आता पर फिर भी नीतू ने धैर्य के साथ मुझे तैयारी करवायी ।हमारी मेहनत रंग लायी और मे इंटर कॉलेज लेवल पर जीतने  के बाद यूनिवर्सिटी लेवल पर भी जीत दर्ज कर पाई । ज़िंदगी की राहों में  सही मर्गदर्शक मिल जाए तो कुछ भी  मुश्किल नहीं।

कुछ इसी तरह मेरे  कॉलेज के शुरुआती साल निकलने लगे …

राजपथ पर चली राजस्थान की शान

कॉलेज के पहले साल मे , मैंने NCC(National Cadet Corps) 6Raj Air Sqn NCC जॉइन किया । NCC मेरे लिए एक ऐसा अवसर था  जहाँ मैंने जीवन के वो गुण सीखें  जो आज भी मेरे साथ है जैसे, अनुशासन , आत्मविश्वास  , टीमवर्क, सामंजस्य, समायोजन  और भी बहूत  कुछ । शुरुआत में तो मैंने NCC की ट्रेनिंग सिर्फ आवश्यक  विषय के तौर की, लेकिन कब ये मेरा जुनून बन गया पता ही नहीं चला । मेरी  परेड करने का तरीक़ा  पूरे  यूनिट मे सर्वश्रेष्ठ  था ।

हमारे कमांडिंग ऑफ़िसर  भी मेरी तारीफ किया करते , और आप समझ सकते हैं की एक आर्मी ऑफिसर की तारीफ मिलना कितना मुश्किल काम हैं । जैसे जैसे मेरा कौशल बढ़ा तो मुझे ‘कैडेट वारंट ऑफिसर ‘ की पोस्ट मिली ।

उसी समय एक सुनहरा अवसर मेरे सामने आया ,RDC ( Republic Day Camp) के तौर पर । ये किसी भी NCC कैडेट के लिए “विश लिस्ट” में एक  होता है पर मौक़ा  कुछ गिने चुने लोगों को ही मिलता है ।इस कैंप के दौरान छः  माह तक अलग अलग जगह पर ट्रेनिंग होती है और उन सभी ट्रेनिंग कैम्पस मे सलेक्ट होने के बाद  नई दिल्ली मे होने वाले कैंप तक जाने का मौका मिलता है । उस कैंप मे चुने गए कैडेट्स राजपथ  पर  26 जनवरी को परेड करने के लिए चुने जाते है ।

ये एक बहूत बड़ा अवसर था  और मै  इसमें सफल होने के लिए अपना सब कुछ दाव पर लगा देने को तैयार थी ।  जब मैंने  कॉलेज प्रशासन से बात की तो उन्होंने मुझे सीधे शब्दों में ‘ना’ कह दिया | लेकिन किसी तरह मैंने कॉलेज प्रशासन से बात की और उन्हें  मनाया ।आखिर में  ये तय हुआ की मुझे इस कैंप के बाद दो सेमेस्टर के एग्जाम एक साथ देने होंगे ।

मैने कैंप के हर लेवल मे अपना बेस्ट दिया । मैं उन कुछ लोगों  मे थी जिनका चयन नईं दिल्ली कैंप के लिए हुआ।

हमे सुबह 2 बजे उठकर ड्रिल प्रैक्टिस के लिए जाना होता था । हम करीब दस घंटे रोज़ाना ट्रेनिंग करते।जिसके बाद  हम सीधा सोने चले जाते , ज्यादातर तो हम हमारे आर्मी बूट्स पहन कर ही सो जाया करते क्योंकि  हमें  फिर उठकर सीधा ट्रेनिंग पर ही जाना होता ।

हर दर्द और तकलीफ के बाद वो दिन आया जब  फाइनल सलेक्शन होना था | मैंने देखा है की मेरे जीवन में मैंने जब भी अपना 100 % दिया है तो किस्मत ने भी मुझे उस चीज़ को पाने मे मदद की है ,लेकिन अगर मैंने 1% भी कमी रखी तो वो चीज़ मुझे हासिल नही होती है ।इस बार मैंने अपना सब कुछ इसमें लगा दिया और इसी  वजह से मुझे राजपथ पर परेड मे शामिल होने का मौका मिला। 

26 जनवरी 2011 को , मैं  NCC की यूनिट के साथ कदम से कदम मिलाये ,  प्रधान  मंत्री और राष्ट्रपति जी को सलामी देते हुए राजपथ से निकलना ये मेरे जीवन के सबसे गौरवपूर्ण  क्षणों में से एक था ।

27 जनवरी  को मझे एक और सम्मान  मिला । प्रधानमंत्री रैली मे मुझे  राजस्थान के  नेतृत्व  का अवसर मिला । मेरे हाथ मे हमारी यूनिट का झंडा और मेरे चेहरे पर गर्व  के भाव लेकर मैंने  रैली  में प्रतिनिधित्व किया । 

 चुनौतियों से सामना 

RDC से लौटने के बाद , मुझे मेरे घर से  फ़ोन आया मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति  जो अब तक जैसे तैसे संभली हुई थी अब बिगड़ चुकी थी और मेरे सामने अब दो ही विकल्प  थे :-पढाई छोड़कर वापस  घर लौट जाना और  शादी करके सामान्य  ज़िन्दगी जीना जो मेरे बस में  कभी था  ही नहीं। 

  1. खुद की पढ़ाई का खर्चा  खुद उठाना और पढ़ाई  जारी रखना 

पहला विकल्प तो कभी विकल्प था ही नहीं क्योंकि मुझे ऐसी ज़िंदगी जीनी ही नहीं थी । तो अब मेरे आगे सिर्फ एक ही रास्ता था खुद के लिए  पैसा कमाना ।मैं  डर गयी थी मुझे लगने लगा  की मेरे आगे अब कोई रास्ता ही नहीं है क्योंकि मैंने कभी जॉब  नही किया था। मैं अपने कमरे में बैठे बैठे रो भी दी , पर फिर मुझे मेरे बैच के लोगों ने और सीनियर्स ने सबने  समझाया । नीतू  इसमें मेरी मदद के लिए आगे आई क्योंकि वो खुद भी ऐसी परिस्थितियों से जूझ  चुकी थी ।हमने साथ मे एक आइसक्रीम पार्लर  पर काम करना शुरू किया । सुबह 10 से 5 कॉलेज जाते और 6 से 12 हम वहाँ  काम करते । मुझे  हॉस्टल छोडना  पड़ा क्योंकि वहां 6 बजे बाद एंट्री ही नही थी ।

ये जॉब देखने मे जितना आसन था हमारे लिए उतना ही चुनौतिपूर्ण ।कई लोग हमें हेय द्रष्टि से देखते क्योंकि हम वेटर  का काम कर रहे थे । लौटते समय हमें  12 – 1 बज जाते , इतनी रात मे हम दोनों अकेले लिफ्ट मांग कर घर लौटा करते ।

ऐसा करते करते मैंने जीवन में  पहली बार 3000 रूपए कमाए । फिर हमने कई सारे जॉब किये क्यूंकि सर पर अब पैसा कमाने का भूत सवार था । हम पुरे दिन मे सिर्फ एक प्लेट पानी पूरी और हाफ प्लेट पुलाव खाते और जितने हो सके पैसे बचाते जो हमें आगे आने वाले वक़्त मे काम आ सके ।

ज़िंदगी की ताल पर नृत्य

 एक के बाद एक जॉब करने के बाद भी  मेरा डांस करने का जुनून हमेशा ज़्यादा हावी  रहा ।मुझे आज भी याद है मैंने पहली बार  कॉलेज डांस कॉम्पिटिशन जीतने के लिए डांस सीखने का फैसला किया था । गॉडविल सर नामक  एक कोरियोग्राफ़र को  मैंने 500 रूपए देकर एक गाने  “ कहता है मेरा ये  दिल  पिया” पर क्लासिकल  डांस सीखा ।उसी  गाने पर  वर्कशॉप्स और संगीत मे डांस सीखा सीखा कर 5000 रूपए से ज्यादा कमा लिए | इसी तरह में एक डांसर से कोरियोग्राफर भी बन गयी ।

 जैसे जैसे मे डांस में निपुण  होने लगी  , नीतू ने उस डांस  से पैसा कमाने की कला ढूँढ  निकाली ।उसने   कोरियोग्राफी से जुड़े इवेंट्स लेना शुरू किया ।मेरा डांस की और रुझान अब और भी ज़्यादा बढ़ने लगा । मैंने कई क्लासेज पर डांस सीखा और कईयों को सिखाया भी।इसके साथ ही मुझे एक जिम मे एरोबिक्स सेशन  लेने का काम मिला ।  परिस्थितियों ने  उसे कुशल मार्केटर बना दिया था  हैं और  हर बार वो कोई न कोई नया आईडिया निकाल  ही लेती।

 नीतू चाहती थी की मेरी पब्लिक फेस वैल्यू बने इसलिए वो मुझे बार बार अलग अलग कम्पटीशन में भाग लेने के लिए प्रेरित  करती रहती  हम किसी  तरह ऑडिशन की फ़ीस ‘जुगाड़ ’ लिया करते और मैं कम्पटीशन में  भाग  लेती ।ऐसा ही एक कम्पटीशन था Rhythm Dance Academy द्वारा  आयोजित एक डांस कम्पटीशन जिसमे DID के सुपरस्टार धर्मेश सर जज के तौर पर आये ।

उस समय मै  कहीं डांस सीख नही रही थी लेकिन  मेरे अलग आईडिया और मेरी कोरियोग्राफी ने मुझे उस कम्पटीशन में जीता  दिया | धर्मेश सर  के हाथों  अवार्ड मिलना मेरे लिए एक सपने के सच होने जैसा था। इसके बाद तो मुझे कई सेलेब्रिटीज  से अवार्ड मिले जैसे सरोज खान मेम  , तेर्रांस लुईस सर , सुमित पेंडम  सर , राजीव सुरती सर, पॉल मार्शल फ़िरोज़ खान आदि और ये अवार्डस का सिलसिला आज तक थमा ही नहीं । मुझे पुरे उदयपुर मे एक “डांसिंग क्वीन”  के तौर पर पहचान मिली ।

इस तरह इतना सब कुछ करते करते मेरे कॉलेज का फाइनल ईयर आ गया । मै  पढाई में बहूत अच्छी तो नहीं  थी लेकिन  नीतू ने मेरी बहूत मदद की उसने  आसान  नोट्स बनाकर, मेरे प्रोजेक्ट्स बनाकर  कभी किसी और तरह से समझाकर मुझे एग्जामस  की  लिए तैयारी  करवाई ।और मैंने भी 100% मन से मेहनत की । इस तरह हमारे अथक प्रयासों से मैं कॉलेज मे दुसरे स्थान पर रही । मुझे ग्रेजुएट होने के साथ एक और बड़ी उपलब्धि  ‘बेस्ट आउटगोइंग  स्टूडेंट ‘ के अवार्ड से नवाज़ा गया ।RDC में जाने के कारण मझे विश्व विध्यालय का सबसे उच्च समान ‘’Special Ability Award’’ भी  मिला ।

डांस से डांसिंग फ़िटनेस की ओर 

जैसे ही मेरी डिग्री ख़तम हुई तो मेरे आगे फिर से घर लौट जाने का निमंत्रण था पर मुझे लौटना कभी था ही नहीं । तो मैंने M.SC. में दाखिला लेने का फैसला लिया ।किसी तरह मैंने फॉर्म और फ़ीस भरी।जब मे घर लौटी तो नीतू  ने मुझसे एक सवाल पूछा  और उस संवाद ने मेरी जिंदगी का सच ही बदल दिया ।  उन्होंने कहां तुझे सच मे पढना है और मेरे अन्दर से एक आवाज़ आई नहीं !!!” क्योंकि मेरा रुझान  पढाई की जगह डान्स में ज्यादा था  ।

मैं चाहती थी की मेरी कला मेरा डान्स  ही मेरी पहचान बने । तब मेरा सपना था एक डांसिंग सेलेब्रिटी बनने का । Dance India Dance के लिए मेरे अन्दर पागलपन था ।  मैं उदयपुर के सभी बड़े डांस कोरियोग्राफेरज  से सीख चुकी थी और अब आगे सीखने के लिए कहीं और जाना स्वाभाविक ही था ।

मुझे एक कॉम्पिटिशन के सुमित पेंडम  सर की डान्स अकेडमी  जो की वडोदरा में है, के बारे मे पता चला था ।

हमने वडोदरा को चुना क्योंकि हर साल वहां से कोई न कोई डांसर  रियालिटी शोज में आता ही आता था । मुझे भी टी.वी रियलिटी शो मे जाने का भूत सवार था ।मैंने  TANZEN Academy पर सुमित पेंडम और उन्हीके जैसे कई सेलेब्रिटी डांसर्स के साथ सीखना शुरू किया ।

नीतू ने इस बार भी एक  बहूत  शानदार आईडिया निकल लिया था मेरे डांस से हमारी आजीविका चलाने का । उन्होंने एक बार फिर इवेंट्स, रोड शोज  आयोजित करना  शुरू कर दिया  । यह हमारी आजीविका का साधन हो गया और इसके आगे में जो भी कमाती वो कुछ नया सीखने में लगा देती ।

 नीतू ने उसकी  इवेंट कंपनी नितांजु इवेंट्स” भी रजिस्टर की । मैंने कई डांस कॉम्पिटिशन जीते थे और इधर नीतू ने  राजस्थान में सिलेब्रिटी डांस वर्क्शाप आयोजित  की। इन वर्क शॉप्स के दौरान मैंने बड़े बड़े डांसर्स के साथ स्टेज शेयर भी किये जैसे निधि पटेल जिन्हें ‘Krump Queen ’ के नाम से जाना जाता है , हेमंत गोरखा, सुमित पेंड़म, सुशांत खत्री   जैसे कई बड़े नाम मेरे साथ जुड़े जिसमें मैंने कई सिलेब्रिटीज़ को असिस्ट किया और उनके साथ स्टेज शेयर  करने का मौक़ा मिला इससे मेरा एक प्रोफेशनल पोर्टफोलीयो  बना । इस पोर्टफोलियो के दम पर हमने कई शहरो मे वर्क शॉप्स, कैम्प और इवेंट्स किए । इसके बाद मुझे जज बनने का मौका भी मिला ,  Tap Your Toe में जो की नितांजू इवेंट्स  द्वारा आयोजित   किया गया था । इसके grand  final मे सुशांत खत्री भी सिलेब्रिटी जज  के तौर पर आये थे ।

इन सब अनुभवों से  मुझे काफ़ी कुछ सीखने को मिला  और अब`मै अलग ही विश्वास के साथ हर साल टी.वी . रियलिटी शो के  ऑडिशन देती रही लेकिन टी.वी .. पर आने के लिए सिर्फ डांस काफ़ी नहीं होता , उन्हें एक मसालेदार कहानी भी चाहिए होती है जिसकी वजह से मेरा कभी टी.वी . राउंड तक सिलेक्शन नहीं हुआ ।

Tanzan पर मेरे डांस मेंटर संतुष्ट कंसारा  ने मुझे एक फ़िट्नेस क्लास  मे एरोबिक्स बैच लेने के लिए कहा मेरी कुशलता से प्रभावित होकर  के उन्होंने  मुझे वहां रेगुलर  बैच ऑफ़र कर  दिये ।   

वहाँ  मेरी मुलाक़ात निलेश फतनानी   से हुई जिन्होंने मुझे ज़ुम्बा और बोकवा  के बारे मे बताया पर मुझे नहीं मालूम था की बोकवा से  ही मेरे जीवन की कहानी का  नया अध्याय लिखा जाएगा।

बोकवा और जुम्बा से मिला इंटरनैशनल चार्म 

कुछ नया सीखते रहने की तलब  मुझे  हमेशा ही रही है और इसी  वजह से वक्त आने पर मैंने खुद को अपने कम्फर्ट  ज़ोन से बाहर निकाल कर और अधिक मेहनत की है  । मेरे मानना है की हमें हर दिन कुछ नया सीख कर आगे बढते`रहना चाहिए ।

मुझे पता लगा की फ़िटनेस  में  इंटरनेशनल लेवल के सर्टिफिकेशन भी होते है, जो काफी महंगे होते है लेकिन तलाशे जाये तो उतने ही  संभावनाये और अवसर भी है  । नीतू मेरी बिज़नस “बैकबोन” थी | उसे इन्वेस्टमेंट और रिटर्न की कैल्क्युलेशन में हमेशा से ही  मास्टरी थी, हमारे पास इतना पैसा नही था तो हमने दिमाग़ लगाया और क्रेडिट कार्ड से रास्ता निकाला । मैंने ज़ुम्बा और बोकवा  में सर्टिफिकेशन किया  जिसकी फ़ीस क्रमशः लग भाग 16000 रूपए  12,600 रूपए के करीब थी ।

 इसके बाद मुझे बोकवा  बहूत  दिल्चस्प लगने लगा और मैंने बोकवा  से जुड़े आगे के सर्टिफिकेशन जैसे जैसे भारत मे आते गए वैसे वैसे कम्पलीट किये । इन सभी सर्टिफिकेशन को करने में हमने 1 लाख रूपए से ऊपर खर्च कर दिए थे और कोई भी ट्रेनर जो  अभी  करियर के लिए फ़ाइट कर रहा हो उस समय मे ऐसा करना तो दूर सोच भी नही सकता था।

मैंने मेरे सीनियर इंस्ट्रक्टर निलेश फतनानी  सर के एक के बाद एक तीन सर्टिफिकेशन असिस्ट  किये । इसकी वजह से मे भारत की पहली ऑफिसियल  BT (Bokwa Trainee) बनी जिसे बोकवा ब्रांड ने BT Amount pay किया ।

इसके बाद हमने कई शहरों  मे जहां पहले डान्स वर्क्शाप कर चुके थे, फिटनेस वर्क शॉप आयोजित करने का फैसला लिया । सोमवार से शुक्रवार तक मैं  रेगुलर बैच लेती अलग अलग जिम्स में और शनिवार और रविवार को मैं ‘Master Class’ लेने के लिए अलग अलग शहरो मे जाती । ये क्लासेज इतनी लोकप्रिय  हुई की हमारे पास 2-3 महीने की एडवांस बुकिंग रहती । हम एक घंटे की वर्क शॉप से करीब 10 से 15 हजार रूपए कमा लिए करते थे ।

इस तरह स्मार्ट वर्क करके हम अच्छे पैसे कमाने  लगे और  रीसॉर्सफूल  बनने  लगे ।

मैं इस फील्ड मे और आगे बढ़ी और मै सभी सर्टिफिकेशन के साथ खुदको अपडेट रखते थी । इस वजह से भारत की फिटनेस कम्युनिटी मे भी मेरा नाम होने लगा । मै  ‘बोकवा  ट्रेनर’  के बाद ‘ बोकवा एम्बेसडर ’ बनी। इसके बाद मै BEST (BOKWA EDUCATION SPECIALIST TRAINER) बनी जिसे मास्टर ट्रेनर भी कहा जाता है। संजोग से उसी साल भारत में  पहली बार  Bokwa Sequence Shoot  हुआ जिसमें  भारत के बेहतरीन बोकवा  इंस्ट्रक्टर  को बुलाया गया । बोकवा से मिली  सफलता ने  मेरा डांस का प्यार कब रिप्लेस हो गया पता ही  नहीं चला और फिटनेस ही मेरी आजीविका बन गए ।

वैसे तो सीक्वेंस शूट मे सिर्फ विदेश  के लोग ही लीड किया करते थे । उन्होंने पहली बार  फैसला किया की इस बार वो किसी भारतीय को लीड करने का मौका देंगे ।मास्टर ट्रेनर्स से कहा गया की वो अपने अपने राज्यों  से ट्रेनर्स की टीम तैयार करे । लेकिन हमारे लिए इंस्ट्रक्टर की टीम को चेन्नई लेकर आने के लिए फंड्स जुटाना मुश्किल था ।एक बार फिर हमारी आईडिया मेकर  ने उपाय दिया फ़िट्नेस इवेंट से स्पान्सर्शिप उठायी जिससे हमने ये फंड्स  मैनेज किये।

टीम राजस्थान की परफॉरमेंस ने वहां धूम मचा दी , हमें ‘Wall of Fame Award’  से नवाजा गया । इसके बाद  मुझे सीक्वेंस शूट को लीड करने का मौका मिला । मुझे बोहोत नर्वस फील हो रहा था क्योंकि मे पहली बार कैमरा को फेस कर रही थी  लेकिन जैसे मैंने शुरू किया तो मैं उस क्षण मे ही कहीं खो गयी| जब शूट खतम हुआ, मिस्टर पॉल मावी , जो की बोक्वा के क्रिएटर है उन्होंने मेरे पास आकर कहा की ‘You were the best’उनके ये शब्द मुझे 440 V के झटके से लगे और मुझे बेहद  ख़ुशी थी की मुझे उनसे तारीफ सुनने का मौका मिला ।

बोकवा  मे इतनी उपलब्धियों  के बाद मे समझ गयी ,मुझे कहीं कहीं अंदेशा हो गया था की मेरा जीवन अब एक नया मोड़ लेने वाला है ।

पॉवर लिफ्टिंग - जीवन की एक नई राह

बोकवा मे इतना नाम कमाने की वजह से मुझे हैप्पी स्ट्रीट नामक एक Times of India के अभियान  में मुझे बोकवा का प्रतिनिधित्व करने का मौक़ा मिला  जिसमे मुझे  हजारों  लोगो के बीच टीम  के साथ स्टेज पर परफॉर्म करना था । इसके बाद कहीं न कहीं मेरे फिटनेस ट्रेनर के सफ़र को और पंख लग गए क्यूंकि मुझे अब वडोदरा का  बच्चा बच्चा और चप्पा चप्पा जानने लगे थे ।

मुझे ग्रुप ट्रेनिंग के साथ साथ अब पर्सनल ट्रेनिंग के लिए भी माँग  आने लगी ।ना बोलना तो  कभी सिखा ही  नहीं था और पर्सनल फिटनेस ट्रेनिंग अब नयी चीज थी तो मैंने आगे जाने के लिए एक प्रॉपर कोर्स करने का फैसला किया ।

मैंने वडोदरा  के सबसे अनुभवी मेंटर को  चुना जिन्हें पुरे देश मे जाना जाता है, ज्वलंत भट्ट सर । वे फिटनेस के फील्ड में पिछले 35 सालो से काम कर रहे है।जिस तरह वो फिटनेस के बेसिक्स को सिखा सकते है वैसा शायद की और कोई कर पाए।एक बार फिर मैंने अपना 100% देना शुरू किया , जिस वजह से मुझे ज़ुम्बा और बोक्वा के भी कई बैच छोड़ने पड़े ताकि मैं पूरी तरह से अपने खान-पान, ट्रेनिंग और  स्लीप पैटर्न पर ध्यान देना शुरू किया जो की मेरी बॉडी के लिए ज़रूरी था | 

एक जिम में ज़ुम्बा सेशन लेते वक़्त में लेट हो गयी , तो मैंने उसी  जिम मे कुछ weight उठाकर  एक्सरसाइज करना शुरू किया । उस जिम  के ट्रेनर्स  ने मुझे जब देखा तो मेरी एक्सरसाइज फॉर्म से काफी प्रभावित  हुए और  उन्होंने  मुझसे पूछा कि  “आप  पॉवर लिफ्टिंग क्यों नही करते है?       

मैंने पॉवर लिफ्टिंग के बारे में पहले सुना नही था , तो मैंने उन्ही से पूछा और  उन्होंने मुझे  इस स्पोर्ट की जानकारी दी। मुझे पॉवर लिफ्टिंग बहूत अनोखा लगा और नया सीखने के लिए तो मे हमेशा तैयार रहती ही  हूँ । इसके सिर्फ दो दिन बाद ही एक पॉवर लिफ्टिंग कम्पटीशन था तो मैंने इसमें हिस्सा लिया । मैंने मेरे सीनियर्स और दोस्तों  के साथ सिर्फ दो दिन तैयारी की । मैंने उस प्रतियोगिता मे भाग लिया और  ज़िला स्तर पर स्वर्ण  पदक जीता ।इसने मुझे और प्रेरित  कर दिया । जब भी आपको आपके प्रयासों के लिए अवार्ड या  रिवॉर्ड मिलता है तो आपको उस काम में और आगे बढने की प्रेरणा स्वतः ही मिलती रहती है। 

मैंने और मेहनत करना शुरू किया और बहूत  अनुशासित तरीक़े  के साथ तैयारी की ।इसके बाद मैंने कई प्रतियोगिताओं में  मैडल पर मैडल जीते  | इसके बाद नेशनल प्रतियोगिता आई | मैंने महीनों  तक इसके लिए तैयारी की थी लेकिन फिर भी मैं कहीं न कहीं नर्वस तो थी | जब मैंने मेट पर कदम रखा और उस वेट को उठाया  तो मेरी मेहनत ने मेरा साथ दिया  और  नेशनल लेवल पर ना केवल  ब्रोंज़ मैडल बल्कि वहाँ उपस्थित लोगों का दिल भी जीत लिया  |

हर वो क्षण जो मैंने जिम में मेहनत करते हुए बिताया था वो  मेरी आँखों के सामने था और कहीं कहीं  मैंने मेहनत के पसीने से कामयाबी की  जीत का मीठा  स्वाद चखा| 

फ़िटनेस की टिकिट पर वियतनाम का सफ़र ​

 

कहते है की “जहाँ चाह वहाँ राह ” लेकिन मैंने मेरे अनुभव मे पाया की एक बार अगर आप पूरी चाह के साथ उस राह पर चलने लगते है तो  ज़िंदगी आपके लिए नए द्वार स्वयं ही खोल  देती है अगर आप खुद को मेहनत की भट्टी मे तपने  को तैयार है तो आपका के  भाग्य के सितारे  को भी चमकने से कोई नहीं  रोक  सकता। 

मेरे भाग्य का सितारा भी चमका  और मुझे वियतनाम  की एक जिम से कॉल आया ।वो मुझे  उनके देश के विभिन्न शहरों  मे  अलग अलग फ़िटनेस वर्क शॉप के लिए बुलवाना चाहते थे | उन्हें मेरे  सोशल मीडिया से` मेरे बारे में पता चला था ।यह मेरे जीवन का एक बहूत  अलग अनुभव  होने वाला था तो मे भी इस प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए उत्सुक  थी ।

उन्होंने मुझे 1 साल का कॉन्ट्रैक्ट दिया  मुझे लगा कि इसके आगे मुझे और अच्छे अवसर मिलेंगे  इस सोच के साथ  मैंने वडोदरा वाला फ़्लैट पूरी तरह ख़ाली कर दिया।

अब मै निकल पड़ी एक नई उड़ान  के लिए , और ये मेरा पहला इंटरनेशनल एक्सपीरियंस था तो उत्सुकता ने मुझे जकड़े रखा ।मेरे मन मै  ये विश्वास था की मैं वहाँ जाकर भी अपना 100% ही दूंगी और देश के गौरव को और ऊँचा करुँगी ।

जब मेरी फ्लाइट ने लैंड किया और मैंने  पहली बार अपने देश की सर ज़मीन के बाहर  कदम रख मै  हैरान थी  क्योंकि  काफी  लोग मेरे स्वागत के लिए वहां  आये थे । वे मुझे उनके देश के कुछ ख़ूबसूरत गलियां दिखाते हुए उस जगह ले गए  जहाँ उन्होंने मेरे लिए एक स्वागत समारोह आयोजित किया था । एक शानदार वेलकम  इवेंट के बाद  अब समय था पहली वर्क शॉप का ।

पहली वर्क शॉप के बाद मुझे कई चीज़े सीखने को मिली और कई चीजों से मे आश्चर्य चकित रह  गयी ।  वियतनाम के लोग इंग्लिश नहीं जानते है और  अपनी बोली को ही सर्वश्रेष्ठ मानते है । वहां का खान पान भी हमारी संस्कृति से एक दम भिन्न है ।

हालांकि वहाँ  पर मुझे अच्छी आमदनी के साथ  बेहतरीन सुविधाये  भी मिली लेकिन  मुझे वहां  पर ट्रेनिंग देते वक़्त लगा की ये चीज़ मेरे लेवल से मुझे वापिस बेसिक्स की और खींच रही  है और मुझे अभी खुद को आगे बढ़ने की और ज्यादा ध्यान देना है ।

वर्क शॉप्स खतम होने के बाद भी मुझे कुछ हफ्तों का समय मैंने वहाँ बिताया  उस दौरान मैंने वहाँ के सुन्दर शहरों  को एक्स्प्लोर  किया । एक सुन्दर अनुभव के साथ मै छः महीने बाद ही  स्वदेश लौट आई ।

भारत आने के बाद , मैं फिरसे वडोदरा शिफ़्ट  हुयी और अपनी ट्रेनिंग को एक नए मुकाम की और ले गयी । मुझे खुद को दोबारा सेटल करने मे कुछ महीने लगे पर फिर सब पहले जैसा हो गया ।

तो एक बार फिर आगे बढ़ने की सोच के साथ मैंने और कड़ी  मेहनत करना शुरू कर दिया।

 

फ़िटनेस से मेरा लगाव

 आज मे पूरी तरह से अपनी और मेरे क्लाइंट्स की फिटनेस को समर्पित हूँ फिटनेस अब मेरे लिए सिर्फ एक पेशा होकर एक ज़रिया है अपने देश के लिए कुछ अच्छा करने का और लोगों को प्रेरित  करने का ।  आज मै एक पर्सनल और ग्रूप  फ़िट्नेस ट्रेनर हूँ साथ ही  बोकवा  और ज़ुम्बा  के भी रेगुलर बैच लेती हूँ

पिछले लग भाग एक  साल से मैं एक  योग प्रेमी भी बन गयी हूँ | योगा मेरी जीवन शैली मे एक ठहराव लेकर आया है , और मूझे और निखारने मे योग का बहूत  बड़ा योगदान है | 

कोरोना वायरस की वजह से  लॉक डाउन ने अब मेरे फ़ोन को मेर जिम फील्ड”  बना दिया है  क्योंकि अब जो भी ट्रेनिंग मै  दे रही हूँ वो सब इसी से मुमकिन हो पा रहा है | अब विडियो कालिंग द्वारा वर्चुअल ट्रेनिंग नया ट्रेंड बन चुका है। मैंने नये वर्ष पर 1 जनवरी 2020 को एक संकल्प लिया था #365daysfitnesschallenge एक  कि  मै  रोज़ इन्स्ताग्राम पर एक फिटनेस से  सम्बंधित  विडियो पोस्ट करुँगी  और आज मुझे 167वाँ  दिन हो गये है रोज़ विडीयो पोस्ट करते हुये।मुझे इन वीडियोस के लिए काफी सकरात्मक  प्रतिक्रिया भी मिलती  रहती है   | मुझे कई लोगों के सकरात्मक  मेसेज आते है की मेरे वीडियोस से उन्हें सीखने में  काफ़ी आसानी होती  है।

अगला लक्ष्य

 मुझे आगे एक टॉप क्वालिटी  एथलिट बनना है जिसके लिए मेरी ट्रेनिंग पुरे जोरो शोरो से चल रही है ।मै फ़िटनेस के क्षेत्र में  एक ऐसे मुक़ाम  तक पहुंचना चाहती हूँ  जिससे मुझे  देखकर दुसरे लोग  भी  प्रेरित हो और अपनी फिटनेस पर काम करे  मै एक ऐसे फ्य्सिकुए तक पहुंचना चाहती हूँ  जिससे देखकर दुसरे प्रेरणा ले और अपनी फिटनेस पर काम करे । 

सोशल मीडिया पर मै अपनी रुचि अनुसार कभी कभी कुकिंग से सम्बंधित  पोस्ट भी डालती थी , उन्हें देखकर मुझे कई लोगों ने एप्रोच किया की आप ये रेसिपिएस हमारे लिए भी बनाये  | तो अब लोगो  को फिट बनाने की और मै एक और अनोखी शुरुआत करने वाली हूँ  जिसका नाम है “ Ritu’s Kitchen ”, जिसमे मैं लोगों के लिए वो रेसिपीस बनाने  वाली  हूँ जो उन्हें  अपनी हेल्थ मेन्टेन करने मे मदद करें | 

आप ऐसा कह सकते है की मैं पूरी मेहनत के साथ के ऐसा  रास्ता बनाने मे लगी हूँ जिसे आम नागरिक अपनाए और स्वस्थ  और  निरोगी रहे।  

दिल की बात, पहूँचे सभी तक

मैं सिर्फ इतना कहना चाहती  हूँ ,  आप कुछ भी करें  लेकिन आप कहीं रुक न जायें ।आप खुद के सामने  कम से कम कुछ विकल्प बनाये रखें । मेरे पुरे करियर के दौरान आज तक मैंने हमेशा यही कोशिश की  है की मैं कहीं रुकूँ  नहीं  और निरंतर आगे बढती रहूँ । 

चाहे आप जो भी करते हों उसे  पूरी शिद्दत के साथ करें और उसे हर क्षण अपनी मेहनत और अधिक नवाजते  रहिये ।

हर एथलिट के  कुछ अतिरिक्त खर्चे  जरुर होते  है क्यूंकि उन्हें अपनी डाइट , बॉडी  और कई चीजों पर  खर्च करना पढता है । मैं आज तक सब कुछ मैनेज  करती आये थी और आगे भी करती रहूंगी क्योंकि  मेरी फाइटर स्पिरिट ना  कभी कम हुई ना कभी कम होगी |

तो हमारे ज़िद्दी साथियों , ये था  रितु मेडतवाल का “दो चोटी वाली शर्मीली लड़की से आयरन लेडी” तक का सफ़र, एक छोटे शहर  के घर की चार दिवारी से निकल कर आज एक ग्लोबल स्टेज  तक धूम मचाने तक का सफ़र” हमें उनकी लगन से सीखना चाहिए |

टूटे नाखुनो से लेकर  टूटी हड्डियों  तक , रितु ने सब कुछ सहा है और हमेशा अपने  अन्दर  एक उत्साह की  अग्नि को प्रज्वलित रखा जो उन्हें आगे बढाती आई  है | हमें भी इसी तरह  हर दिन आगे बढ़ने और कुछ नया करते रहने का प्रण लेना चाहिए | 

हम एक बार फिर लौटेंगे एक ऐसी कहानी के साथ जो आपके होश उडा दे और भर दे आप में जोश और जुनून | तब तक के लिए 

Stay passionate, Stay Stubborn

रितु से सम्पर्क करे

रितु मेडतवाल का सफ़र उनके शब्दों में

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